થોડા શબ્દો

1) आज डायरी खोली,इक गुलाब मिला सुखा सा,
काश के उसे दे दिया होता… !

2) 20 साल पहले सोचा था ये गुलाब उसे दूंगा,
सोचते सोचते वक़्त गुज़र गया और गुलाब इक किताब में सुख सा गया ।

3) में तो गभराहट में कभी कुछ कहे नहीं पाया,
तुम्हारी क्या मज़बूरी थी की मुस्कुराती थी पर बोलती न थी ।

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